सच को भी तो सुन लो जरा

अपनी आँखों से भ्रम का चश्मा तो हटाओ जरा,
दुनियाँ को कैसा समझा है बतलाओ तो जरा |
भ्रम के परदे है बड़े ही अंधियारे,
इनमें सच का दीप तो जलाओ जरा |
लोगो कि सुनी अब तक तुमने,
बात हमारी भी समझो तो जरा |
मैं कहता हूँ सच है क्या,
अब सुन भी तो लो जरा |
मिथ्या की गठरी है भारी,
छोड़ इसे सच को भी तो सुन लो जरा |
विश्वास तो एक तिनके की है तरह ,
विश्वास करके तो देखो जरा |
यूँ न मूंदो आँखे,
सच को स्वीकार कर के तो देखो जरा |

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