हसीं ख्वाबों सा मेरा साया.
हर रात के हसीं ख्वाबों सा मेरा साया. कभी घटता कभी बढता, चंदा सा मेरा साया, सहरा कि रेत पे,मोती सा मेरा साया, समंदर कि लहरों सा मेरा साया, मेरी हर एक ख़ुशी में खुश, ग़म में ग़मज़दा ऐसा है मेरा साया, हशरतों से भरा, लहरों कि तरह उमड़ता सा मेरा साया, जाने क्यों कहते हैं कि अँधेरे में साथ छोड़ देता हैं साया, हर रात का अंधियारा हि तो हैं मेरा साया, सर्द रातों की पलंग पे चादर सा मेरा साया. हर रात के हसीं ख्वाबों सा मेरा साया.