उम्मीद की किरण
झुकी पलकों के पीछे, बंद संदूक में , कंटीले बाड़ के पार, अंधियारी गुफा में, क्या है छिपा, किसको पता, कोशिश करो उन बंद पलकों की गहराइयों में, जो है छुपा उसे समझने की . खोलो उस संदूक को, टटोलो वो लम्हे, कुछ खट्टे कुछ मीठे. स्वप्न से सुन्दर, जल से निर्मल, कुछ जाने-अनजाने से. आवाज दो उस बाड़ के परे, उन गुफाओ की वीरानियो में , शायद कोई बैठा हो, सहमा हुआ, घुप अंधियारे से डरा हुआ . इक किरण के इंतज़ार में .